जहां वर्षों से सड़कों पर कराहती है जिंदगी वहां बनेगा विश्व का सबसे बड़ा मां सीता की प्रतिमा !

दशकों बीत जाने के बाद भी एक ओवर ब्रिज तो बना नहीं,सपना तो नहीं रह जाएगा यह दावा भी ?

सीतामढ़ी : जगत जननी मां सीता की धरती सीतामढ़ी अपने विकास के खोखले दावे को लेकर हमेशा ठगा हुआ महसूस करती है. जहां रोज सड़कों पर ना जाने कितनी महिला रूपी सीता अपने जीवन के लिए कराहती है,सड़क पर ही अपने बच्चे को जन्म दे देती है, वहां इस तरीके के दावे हो तो सवाल उठना लाजमी है कि यह दावा भी मुंगेरीलाल के हसीन सपने के जैसे सीतामढ़ी वासियों को दिखाया तो नहीं जा रहा है ?

वर्षों से लंबित एक अर्धनिर्मित ओवर ब्रिज तो बना नहीं अब सीतामढ़ी वासियों को विश्व के सबसे भव्य मां सीता की प्रतिमा जिसका लागत 400 करोड़ आंकलन किया जा रहा है बनाने का दावा किया गया है. सीतामढ़ी सर्किट हाउस में श्री भगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति के तत्वाधान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया,जिसमे मुख्य मार्गदर्शक रामायण रिसर्च काउंसलिंग के श्री श्री 108 परमहंस स्वामी सादित्येन्द्र महाराजव अध्यक्ष सह सीतामढ़ी सांसद सुनील कुमार पिंटू व अन्य मौजूद थे.

आपको बताते चलें कि सीतामढ़ी वासियों में भी भगवान राम के भव्य मंदिर के तर्ज पर मां सीता के भव्य मंदिर का सपना जरूर देखा जा रहा है लेकिन अब भी सीतामढ़ी का सबसे ज्वलंत मुद्दा मेहसौल स्थित अर्ध निर्मित ओवर ब्रिज को ही माना जा रहा है . जिसने ना जाने कितने कराहते हुए मौत को देखा है,जिसका गवाह है यह इन्तजारमयी अर्धनिर्मित ओवरब्रिज. इसके इंतजार में ना जाने और कितने लोगो की कराह सड़क की जाम में निकलेगी. आश्वासन और सिर्फ आश्वासन मिला है सीतामढ़ी वासियों को.

इस ज्वलंत मुद्दे पर लेकिन समाधान अभी दूर दिख रहा है। कागजों पर तो कई प्रयास जनप्रतिनिधि द्वारा किया गया है लेकिन धरातल पर यह असफल ही रहा है. जिस पावन धरती को मां सीता के जन्मस्थली को पर्यटन के क्षेत्र में विकसित होना चाहिए था वह धरती आप भी अपने विकास के लिए कराहती है. जहां लक्ष्मणा की कल कल धारा और संध्या आरती सुनाई देनी चाहिए थी वहां जाम की चीख-पुकार सुनाई देती है.