सरकारी दावों की खुली पोल,विद्यालय में महिना भर से नहीं बन रहा है मिड डे मिल

सीतामढ़ी : आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी सरकारी नियंत्रण वाले प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में न तो शिक्षा का स्तर सुधर रहा है और ना ही इसमें विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाएं मिल पा रही है.

जाहिर है कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा के सुधार के लिए जब तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जाता तब तक हालात नहीं बदलेंगे. बिहार के शिक्षा व्यवस्था की वह बदहाल तस्वीर दिखाएंगे जो सरकारी दावों की पोल खोल देगी, सीतामढ़ी जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर एक विद्यालय जहां महीनों से मध्यान भोजन नहीं बन रहा है.

ऐसी बात नहीं है कि इसकी जानकारी किसी को नहीं है प्रधानाध्यापक की माने तो निरीक्षण के दौरान आए हैं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को भी इस बात की जानकारी दी गई थी कि विद्यालय में मध्यान भोजन का निर्माण नहीं हो रहा है इसके बावजूद भी अधिकारी कानों में रुई कुंभकर्णी निंद्रा में सो रहे हैं, सोए भी क्यों नहीं उनके बच्चे थोड़ी पढ़ते है सरकारी विद्यालय में.

वह तो साहब है अपने बच्चे को किसी अंग्रेजी विद्यालय मैं पढ़ाते होंगे खैर उन बच्चों का क्या जो निम्न मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से सामान्य स्थिति वाले बच्चे जो सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए आते हैं सरकार ऐसे बच्चों के लिए सरकार ऐसे बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन योजना लाती है.

इस योजना का लाभ होता है की गरीब बच्चों को पोषक तत्व युक्त भोजन मिले, जिससे उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में वृद्धि होगी, पर हकीकत में इस योजना के नुकसान से ज्यादा कुछ भी नहीं,लोगों का मानना की योजना पूरी तरीके से दलालों और भ्रष्टाचारियों के चुंगल में फंसी है.