सीतामढी में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गोलमाल, जांच के लिए टीम का गठन

इस समय प्रारंभिक शिक्षक बहाली 2019-20 के आरक्षण रोस्टर में गड़बड़ी की संभावना को लेकर सीतामढ़ी में जांच चल रही है. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में गलत आरक्षण रोस्टर के आधार पर शिक्षकों के बहाली कर लिए जाने की शिकायत का मामला पहुंच गया है, जहां विभाग मामले की पड़ताल में जुट गई है. इस में अतिपिछड़ा और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की हकमारी का आरोप लगाया गया है.

जिले के रीगा प्रखंड के दोघरा गांव के रहने वाले अभिमन्यु कुमार द्वारा पिछड़े वर्गो के लिए राज्य आयोग में दायर परिवाद के आलोक में बीते साल 24 नवंबर को मामले की सुनवाई हुई थी. जिसके बाद आयोग की सख्ती से संबंधित अधिकारियों में इसकी जांच को लेकर खलबली मची हुई है. बताया जा रहा है कि इसके जद में कई तत्कालीन अधिकारी भी आ सकते है.

आयोग ने सुनवाई में अधिकारियों के दलिल से संतुष्ट नहीं होने पर शिक्षक नियोजन वर्ष 2019-20 के लिए जिला प्रशासन को संधारित रोस्टर बेसिक ग्रेड, उर्दू एवं स्नातक ग्रेड की पूर्ण विवरण साक्ष्य समेत उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. 12जनवरी को एक बार फिर से आयोग में मामले की सुनवाई निर्धारित है.

बता दें कि डीएम मनेश कुमार मीणा द्वारा अपर समाहर्ता के नेतृत्व में तीन सदस्ययी जांच टीम गठित है. इसके अलावा मामले की जांच को लेकर डीईओ अवधेश प्रसाद सिंह द्वारा भी पीएम पोषण योजना के डीपीओ संजय कुमार देव कन्हैया के नेतृत्व में एक अलग तीन सदस्यीय जांच टीम गठित है.

बता दें कि जिले में छठे चरण की प्रारंभिक शिक्षक नियोजन वर्ष 2019-20 में प्रश्नगत आरक्षण रोस्टर के आधार पर तकरीबन 11 सौ शिक्षकों की नियुक्ति अलग अलग नियोजन इकाईयों में किया गया था. इस नियोजन में अतिपिछड़ा एवं एससी, एसटी कोटि के लगभग 279 सीटों के हकमारी की संभावाना है. वहीं, जिला शिक्षक नियोजन कोषांग सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 1096 शिक्षक अभ्यर्थियों की नियुक्ति छठे चरण की नियुक्ति प्रक्रिया में पहले हुई थी.